- The best among you is the one who doesn’t harm others with his tongue and hands. -
Prophet Muhammad ﷺ
मुसलमान ईद अल अजहा के दिन मूल रूप से दो काम करते। पहले मस्जिद में ईद की सामुहिक नमाज और फिर कुर्बानी। नमाज आध्यात्मिकता सिखाती है और समर्पण कुर्बानी का जज्बा सिखाती है।
Amar Ujala > Opinion >
Dated. 06 July, 2016.
काबा मुसलमानों का सबसे पाक धार्मिक स्थल है। कुरान में बताया गया है कि हर मुसलमान को अपनी जिंदगी में कम से कम एक बार मक्का की यात्रा ज़रूर करनी चाहिए।
नई ज़िंदगी की शुरुआत का दिन
Dainik Jagran > Opinion >
Dated. 06 July, 2016.
रोज़े के माध्यम से सद्गुणों को निखारने का महीना है रमज़ान, तो ईद मानवीय हितों के लिए खुद को समर्पित कर देने की शुरुआत का दिन है।
आध्यात्मिक जीवन का अभ्यास है रोज़ा
Dainik Jagran > Opinion >
Dated. 15 June, 2016.
रोज़े का अमल शारीरिक रूप से किया जाता है, मगर सही अर्थों में देखें तो वह मानसिक और आध्यात्मिक सतह पर किया जाने वाला एक अमल है।
रोज़ा और इंसानी हमदर्दी
Dainik Jagran > Opinion >
Dated. 09 June, 2016.
हदीस में रमज़ान के बारे में हज़रत मुहम्मद साहब के यह शब्द आए हैं, ‘यानि रमज़ान का महीना इंसानी हमदर्दी का महीना है।’
